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धर्म-संस्कृति हिन्दू जनजागृति समिति एवं सनातन संस्था की ओर से आरंभ किए‘ऑनलाईन’सत्संग श्रृंखलाओं की वर्षपूर्ति के निमित्त से‘कृतज्ञता सप्ताह’का आयोजन
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धर्म-संस्कृति ऑनलाईन सत्संग शृंखला : समाज को सनातन धर्म की दिशा दिखानेवाला पथदर्शक उपक्रम
नई दिल्लीः कोरोना महामारी के संकटकाल में ‘ऑनलाईन’ यह शब्द सर्वसामान्य लोगो के प्रचलन में आया । सर्वसामान्यत: ‘ऑनलाईन’ कार्यक्रम अर्थात आधुनिकता अथवा एक प्रकार की उच्च प्रतिष्ठा का भाग समझा जाता था; परंतु इस संकटकाल में सर्वसामान्य व्यक्ति भी ‘ऑनलाईन’ व्यासपीठ से जुड गया । दूरदृष्टि से यही सूत्र समझकर सनातन संस्था और हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से यातायात बंदी की (लॉकडाऊन की) कालावधि में ‘ऑनलाईन सत्संग शृंखला’ आरंभ की गई । इस शृंखला के  अंतर्गत प्रतिदिन नामजप सत्संग, भावसत्संग, बालसंस्कारवर्ग और धर्मसंवाद इन चार सत्संगों का  ‘फेसबूक’ और ‘यू-ट्यूब’ के माध्यम से ‘लाईव’ प्रक्षेपण किया जा रहा है । इन चारों सत्संगों में अध्यात्म, धर्म, संस्कार, नीतिमूल्य, भक्तिभाव, संतचरित्र के संदर्भ में सरल  भाषा में जानकारी देकर समाज को अध्यात्म जीवन में आत्मसात करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है । प्रतिदिन सहस्रों जिज्ञासु इन सत्संगों का लाभ ले रहे हैं । सत्संग में बताएं अनुसार अध्यात्म जीवन में आत्मसात करने हेतु बताई कृतियां करने पर अनेकों ने कोरोना के संकटकाल में स्वयं के मनोबल और आत्मबल में वृद्धि हुई ऐसी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं । इसलिए यह ऑनलाईन सत्संग शृंखला अर्थात समाज को सनातन धर्म की दिशा दिखानेवाला एक पथदर्शक उपक्रम है ।
 
* प्रतिदिन औसतन ५५ सहस्र जिज्ञासु ले रहें है सत्संग का लाभ
 
२९ मार्च २०२० से आरंभ हुई ‘ऑनलाईन सत्संग शृंखला’ के माध्यम से २ करोड से अधिक लोगोें तक धर्मज्ञान की गंगा पहुंची है । औसतन प्रतिदिन ५५ हजार से अधिक लोग इस सत्संग शृंखला का लाभ ले रहें है । यह प्रतीक है कि, जनमानस का रूझान अब पुन: हिन्दू धर्म की ओर होने लगा है । इस प्रकार के भागिरथी प्रयत्नों से ही एक दिन हिन्दू राष्ट्र की स्थापना होगी और भारत पुन: विश्‍वगुरु के पद पर विराजमान होगा ।
 
* सत्संग की फलोत्पत्ति  
 
अचानक निर्माण हुई कोरोना महामारी में संपूर्ण विश्‍व अस्त-व्यस्त हो गया था, तब यह सत्संग आरंभ किए गए । कोरोना की पृष्ठभूमि पर लगाई गई यातायात बंदी का सीधा परिणाम जनजीवन पर, आजीविका पर होने से सर्वत्र भय और अनिश्‍चितता फैली थी । अभी भी उक्त स्थिति में विशेष परिवर्तन नहीं हुआ है । ऐसी स्थिति में इन सत्संगों के कारण अनेक दर्शकों का मनोबल बढा है, सभी स्थितियों की ओर देखने की सकारात्मक दृष्टि निर्माण हुई है, भौतिक सुख और वैज्ञानिक प्रगति की क्षणभंगुरता समझ में आई है, साथ ही अध्यात्म का महत्त्व भी समझ में आया है । भगवान के प्रति श्रद्धा बढी है । आपातकाल में संजीवनी बनना, यहीं इन सत्संगों की फलोत्पत्ति है ।
 
आपत्ति नहीं, अपितु इष्टापत्ति
 
सनातन संस्था और हिन्दू जनजागृति समिति अध्यात्मप्रसार और धर्मरक्षा के क्षेत्र में कार्यरत अग्रणी संस्था है । सामान्यत: सनातन संस्था और हिन्दू जनजागृति समिति के द्वारा गांव-गांव में जाकर अध्यात्मप्रसार और धर्मजागृति का कार्य किया जाता था; पर कोरोना की प्रथम लहर के समय जब पूरा यातायात अचानक ठप्प हुआ, तब सतकार्य भी बाधित हुआ; किंतु अंतत: भगवान का  कार्य किसी भी संकट से रुकता नहीं, यही इस काल में विलक्षण अनुभव हुआ । कोरोना का विषाणु भी धर्मज्ञान के प्रवाह को रोक न सका । प्रथम जनता कर्फ्यू के एक सप्ताह के भीतर ही सत्संग शृंखला आरंभ हुई । विशेष यह कि नवीनतम साधनसामग्री, प्रशिक्षित मनुष्यबल के अभाव में भी आज तक एक भी दिन खंडित न होते हुए यह ज्ञानगंगा अविरत बह रही है । इस सत्संग के माध्यम से जिज्ञासु कृतिशील हो रहे हैं । हिन्दू धर्म का अद्भूत ज्ञान, हमारी प्राचीन गौरवशाली धरोहर समाज तक पहुंची है । दर्शकों को दिशा मिली तथा उनका हिन्दू धर्म से नाता दृढ हो रहा है । इसलिए कोरोना महामारी को आपत्ति कहने के बजाय इष्टापत्ति कहना अधिक अधिक होगा ।
 
सत्संग का ज्ञानामृत
 
‘नामजप सत्संग’ के माध्यम से अध्यात्म, साधना, नामजप एकाग्रता से होने के लिए किए जानेवाले प्रयत्नों के संदर्भ में जानकरी दी जाती है । सनातन के सद्गुरु नंदकुमार जाधव जी स्वयं सत्संग में नामजप करते है । ‘भावसत्संग’ द्वारा भावभक्ति बढाने के लिए संतचरित्र के माध्यम से मार्गदर्शन किया जाता है । ‘बालसंस्कारवर्ग’ के माध्यम से सुसंस्कारित पीढी के निर्माण हेतु क्रांतिकारियों और राष्ट्रपुरुषों की कथा बताई जाती है तथा ‘धर्मसंवाद’ इस सत्संग के माध्यम से हिन्दू धर्म का अद्वितीयत्व, प्राचीन ज्ञान की धरोहर की जागृति की जाती है । इन सत्संगों को  अब तक मिलें उत्सर्फूत प्रतिसाद के लिए कृतज्ञता, साथ ही इस सत्संग शृंखला का लाभ सभी आत्मोन्नति के लिए  करें, यह प्रार्थना !
 
* कृतज्ञता सप्ताह
 
यह ऑनलाइन सत्संग शृंखला जिनकी प्रेरणा से शुरु हुवी है, वह सनातन संस्था के संस्थापक तथा हिन्दू जनजागृति समिति के प्रेरणास्रोत परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी ने इस उपक्रम को दिए हुए आशीर्वादरूपी संदेश में कहा है की, आनेवाला काल अत्यधिक भीषण और युद्धकाल है । इस काल में इस ‘ऑनलाइन सत्संग’से मिला हुआ ज्ञान समाज के सभी आयुवर्ग के जीवों को संजीवनी के समान सिद्ध होगा । आनेवाले काल में ज्ञान, भक्ति और संस्कार का प्रसार इसी प्रकार अखंड होता रहे तथा इस कार्य में सहभागी होनेवाले सभी की आध्यात्मिक उन्नति हो, यह प्रार्थना है । कोरोना महामारी के संकटकाल में भी विहंगम गति से धर्मप्रसार होना, यह केवल गुरुकृपा ही है । इस पृष्ठभूमि पर ऑनलाईन सत्संग शृंखला की वर्षगांठ के निमित्त ३ से १० अप्रैल कृतज्ञता सप्ताह के रूप में मनाया जाएगा । इन सत्संगों का जिज्ञासु अवश्य लाभ लें ।
 
 
सत्संग देखने के लिए समय और मार्गिका (links) नीचे दिए गए हैं ।
* नामजप सत्संग : सुबह 10.30 और पुनर्प्रसारण सायं. 4.00 बजे ।
* भावसत्संग : दोपहर 2.30 बजे
* बालसंस्कार वर्ग : सायं. 5.00 बजे (शनिवार, रविवार) * धर्मसंवाद : सायं. 7.00 बजे, पुर्नप्रसारण (दूसरे दिन) दोपहर 1.00 बजे
 
Link:
Youtube.com/HinduJagruti
Facebook.com/HinduAdhiveshan
http://Youtube.com/SanatanSanstha1

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