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देश गलवान में अपने सैनिकों की मौत से बौखलाए चीनी, भारतीय दूतावास को कर रहे टारगेट, ऐसे निकाल रहे भड़ास

गलवान घाटी के खूनी संघर्ष में अपने सैनिकों की मौत को लेकर चीन ने हाल ही में सच्चाई स्वीकारी थी। बीजिंग ने मरने वाले सैनिकों की संख्या काफी कम बताई थी, लेकिन इसके बावजूद चीन के लोग बौखला गए हैं। अपनी इस बौखलाहट में वह हिंदुस्थान के खिलाफ हेट मैसेज, अपशब्द और गाली-गलौज पर उतर आए हैं। इतना ही नहीं, चीन में सोशल मीडिया पर भारत विरोधी संदेशों की बाढ़ आ गई है और भारतीय दूतावास को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।

 

बता दें कि गलवान घाटी हिंसा पर चीन द्वारा सच्चाई स्वीकारने के बाद भारतीय दूतावास के वीवो अकाउंट को लगातार टारगेट किया जा रहा है। लोग गालियों से भरे मैसेज भेज रहे हैं। बता दें कि PLA डेली न्यूजपेपर में शुक्रवार को चीन ने दावा किया था कि गलवान संघर्ष में उसके चार सैनिक मारे गए थे और एक की रेस्क्यू के दौरान मौत हो गई थी। इस खुलासे के बाद चीन के लोग काफी भावनात्मक हो गए हैं। हालांकि, अपनी सरकार के खिलाफ गुस्सा निकालने के बजाए वह भारतीय दूतावास को निशाना बना रहे हैं।

 

गलवान संघर्ष में मारे गए चारों चीनी सैनिकों की तस्वीरें वहां की सोशल मीडिया पर वायरल हैं। इस दौरान चीनी नागरिकों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया भी देखने को मिल रही है। चीनी सैनिकों के मरने से वहां के लोगों में गुस्सा इसलिए भी है क्योंकि वहां के लाखों-करोड़ों लोगों ने दशकों बाद अपने सैनिकों को मरते हुए देखा है। यही वजह है कि उनका दुख सामने आ रहा है।

 

चीनी सैनिकों की मौत के बाद से चीन में यूनिवर्सिटी-कॉलेजों में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जा रहा है और मृतक सैनिकों की तस्वीरें लगाईं जा रही हैं। हालांकि, चीनी सरकार पर युवाओं के निशाने पर है। वहां के लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि सरकार ने आखिर इतने दिनों तक यह बात क्यों छिपाई। इन सवालों का जवाब देने के लिए चीन सरकार की ओर उसका मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स सामने आया है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के भोंपू कहे जाने वाले ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में यह बताया है कि आखिर इस सूचना को आठ महीने तक क्यों छिपाया गया।

 

 

वही ग्लोबल टाइम्स लिखता है, 'पिछले साल गलवान घाटी में जो हिंसा हुई थी, उस समय तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए हताहतों का खुलासा करने से बचना सीमा की स्थिति की स्थिरता के लिए अधिक अनुकूल था। ग्लोबल टाइम्स के संपादकीय में कहा गया है कि अब जबकि सीमा गतिरोध का दौर समाप्त हो गया है, हमें चीनी सैनिकों (ग्लोबल टाइम्स ने नायक करार दिया है) के कामों को सार्वजनिक करना चाहिए ताकि सभी चीनी लोग उनके बलिदान को समझ सकें और उनकी प्रशंसा कर सकें।

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