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देश यहाँ से भी देखो!
आजादी के लड़ाई में न जाने कितने #अज्ञात कुलशील बलिदान हुए। जेल गए। भाग लिये। जो #इतिहास में दर्ज हैं , जिन पुरखों को हम जानते हैं उनके अतिरिक्त असंख्य लोगों की आहुति शामिल है।
 
ऐसे ही जे पी आंदोलन, अन्ना आंदोलन...अभी का किसान आंदोलन बहुत से लोग युवा, बुजुर्ग किसानों के साथ #सत्याग्रह में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं। 
 
सभी आंदोलनकारी किसान टिकैतजी की तरह अंतरराष्ट्रीय नहीं बन गए । पर, भागीदारी और भरोसा तो हजारों-लाखों की है न!
 
अगर कोई अज्ञात कुलशील युवा जो किसान आंदोलन में शामिल हो कल #प्रधानमंत्री, #राष्ट्रपति बन जाए तो भले ही 
हम आज उसे न जानते हों पर वह शामिल रहा है उसे वह जानता है न !
 
सत्य-तथ्य का उद्घाटन होना ही चाहिए। कोई भी व्यक्ति गलत तथ्य प्रस्तुत कर रहा हो चाहे राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री ही क्यों न हो उसे सही करते हुए टोकना चाहिए। 
 
पर, #अतिवादी खुन्नस, डाह में हर बात-विचार में टिटकारी नहीं मारना चाहिए। 
जो आप जानते हों, जो बातें आपके #संज्ञान में हो वही सत्य का #सर्वोच्च शिखर नहीं हो सकता न !
आपकी खिल्ली उड़ाने से उसे फायदा मिल सकता है जिसकी खिल्ली उड़ा रहे हों!
संवेदनशीलता, बहुवचन, सहिष्णुता का राग अलापते आप कब #संवेदनहीन व #असहिष्णु हो गए इसका भान  नहीं है आपको। 
सोचियेगा न!
प्रमोद कुमार @pmediaa

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